भारतीय परंपरा में विवाह से पहले कुंडली मिलान का चलन सदियों से चला आ रहा है। वर-वधु की कुंडली देखकर दोनों के स्वभाव, इंट्रेस्ट, स्वास्थ्य आदि का विचार किया जाता है और उसके बाद ही शादी की जाती है। कुंडली मिलान के दौरान 36 गुणों में से कम से कम 18 गुणों का मिलना शुभ माना जाता है। लेकिन दोस्तों आपके दिमाग में भी कभी न कभी ये सवाल जरूर आता होगा कि अगर वर-वधू के 36 में से 36 गुण मिल जाएं तो क्या होगा। क्या उनका वैवाहिक जीवन हमेशा सुखमय बना रहेगा, क्या वैवाहिक जीवन में कभी कोई परेशानी नहीं आएगी, 36 में से 36 गुणों का मिलना कैसा होता है। यदि आपके मन में भी ऐसे ही सवाल हैं तो आइए जानते हैं इसका जवाब। दोस्तों वर वधु की कुंडली को देखकर वर्ण, वश्य, तारा, ग्रह मैत्री, योनि, गण, भकूट और नाड़ी इन सब का मिलान करवाया जाता है...
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