माता दुर्गा की आठवीं शक्ति को माता महागौरी कहा जाता है। नवरात्र के आठवें दिन इनकी पूजा की जाती है। माता महागौरी की अराधना मात्र से भक्तों के सभी पाप कर्म और पिछले जन्मों में किये गए पाप भी धुल जाते हैं। इसके बाद माता पार्वती का अंग चंद्रमा के समान शोभायमान, गौर वर्ण का हो गया। इसके बाद देवी पार्वती गौरी कहलायीं। अत्यंत गौर वर्ण वाली महादेव की प्रिया होने के कारण देवी को महागौरी के नाम से भी जाना जाता है। माता का यह स्वरूप पूर्णत: चंद्र के समान गौर वर्ण का है। इनकी चार भुजाएं हैं और इनका वाहन वृषभ है। इनका एक हाथ अभय मुद्रा में है और एक वर मुद्रा में। वहीं इनकी दो भुजाओं में शिव के समान त्रिशूल और डमरू है। माता अपने भक्तों को करुणामयी दृष्टि से देखती हैं और उनपर कृपा बरसाती हैं। माता का यह रूप सौम्य है। इनकी साधना से व्यक्ति का मन आनंदित हो उठता है।
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