देवी कालरात्रि का प्राकट्य क्रोध से हुआ था इसलिए यह क्रोधित मुद्रा में रहती हैं, लेकिन भक्तों पर देवी माता स्नेह बरसाती हैं। इनके बाल बिखरे हुए हैं और इनका रंग काजल के समान काला है। माता के तीन नेत्र हैं। माता के गले में विद्युत की माला है जो बिजली के समान तीनों लोकों को तेजोमय करता है। देवी कालरात्रि का प्रभाव भानु चक्र पर होता है जो चक्र ना होकर वास्तव में पिंगला नाड़ी है। इसलिए इनकी आराधना मात्र से समस्त सिद्धियों के द्वार खुलने लगते हैं। यह देवी भविष्य में झांकने की शक्ति, इच्छा पूर्ति की शक्ति प्रदान करती हैं। इनकी साधना से साहस और पराक्रम की वृद्धि होती है। जो भी लोग साहसिक कार्य करते हैं जै से, सेना, पुलिस सेवा, चिकित्सा आदि उन्हें माता की पूजा अवश्य करनी चाहिए। इनकी पूजा से करियर क्षेत्र में आपका प्रभाव बढ़ता है। नवरात्रि के सातवें दिन देवी कालरात्रि की साधना करने से नव चेतना का संचार भक्तों के हृदय में होता है।
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